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पूजा घर का निर्माण किस दिशा मे और कैसा होना चाहिए?

पूजा घर ईशान कोण मे बनाना चाहिए। यदि ऐसी सुविधा उपलब्ध न हो तो पूर्व या उत्तर दिशा मे बनाना चाहिए किन्तु दक्षिण दिशा मे कदापि नही बनाना चाहिए। पूजा घर का मुख पूर्व या उत्तर मे ही रखना चाहिए। पूजा घर फर्श से कुछ ऊँचाई पर होना चाहिए। पूजा घर का प्रवेश द्वार पूर्व या उत्तर दिशा मे होना चाहिए। पूजा घर के दरवाजे शुभ लकड़ी के होने चाहिए। पूजा घर मे छत के ऊपर कोई खिड़की या रोशनदान प्रकाश आदि के लिए नही रखना चाहिए। पूजा घर मे दक्षिण और पश्चिम दीवार की ओर अलमारी रखनी चाहिए। पूजा घर मे शोभा के लिए खण्डित मूर्तियां तथा कलाकृति की दृष्टि से मूर्ति, तोरण, सिंहासन कदापि नही रखने चाहिए। पूजा घर मे तिजोरी नही रखनी चाहिए। पूजा घर सीढि़यों के नीचे कदापि नही बनाना चाहिए। पूजा घर के किसी भी कोने मे धन एवं रूपये नही रखने चाहिए।

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