घर के मध्य भाग में कुआं खोदने से धन का नाश होता है और गरीबी का साया साथ नही छोडता। पूर्व दिशा मे कुआं खोदने से धन, सम्पत्ति एवं ऐश्वर्य की वृद्धि होती है विशेषतः वास्तव्य स्थान के ठीक पूर्व में कुआं न खोदा जाये थोडा सा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। आग्नेय दिशा में कुआं खोदने से पुत्र का नाश होता है। पुत्र या सन्तान पर विपत्ति के बादल छाये रहते है और धन की हानि होती है। दक्षिण दिशा मे कुआं बनाने से मानसिक तनाव, स्त्री नाश एवं स्त्री कष्ट होता है। नैऋत्य दिशा मे कुआं बनाने से गृह स्वामी की मृत्यु हो जाती है। पश्चिम दिशा मे कुआं सम्पत्ति दायक होता है। वायव्य दिशा मे कुआं होने से मित्रों की संख्या हीन होती है और शत्रु वृद्धि होती है तथा चोरी होती रहती है। उत्तर दिशा का कुआं सुख प्रदाता होता है, किन्तु वह वास्तव्य स्थान से ठीक उत्तर मे न खोदा जाये इसका झुकाव थोड़ा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। ईशान दिशा मे कुआं खोदने से तृष्टि, पुष्टि एवं सर्व प्रकार के ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। घर के मुख्य द्वार के सामने अथवा अन्य किसी भी द्वार के सामने कुआं या नलकूल आदि खोदना अत्यन्त अशुभ होता है।
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